विशेषण किसे कहते हैं इसके कितने भेद हैं
विशेषण किसे कहते हैं? विशेषण के कितने भेद होते हैं ? | visheshan kise kahte hai aur uske bhed – आज हम आपको इस पोस्ट में एक बहुत ही बढ़िया और महत्वपूर्ण जानकारी बताएंगे यह जानकारी आपके लिए बहुत ही जरूरी है. तो आप इस जानकारी को अच्छी तरह से पढेगे. आज हम आपको इस पोस्ट में बताएंगे कि विशेषण क्या होते हैं. विशेषण का क्या अर्थ होता है. इसकी क्या परिभाषा होती है. विशेष्य क्या होता है. प्रविशेषण क्या होता है. विशेषण कितने प्रकार का होता है विशेषण की कितनी अवस्थाएं होती है विशेषण किस तरह के होते हैं. इन सभी के बारे में हम आपको पूरी विस्तार से जानकारी देंगे. क्योंकि आजकल बहुत से बच्चे ऐसे होते हैं .जो कि पूरा साल नहीं पढ़ते और जब एग्जाम नजदीक आते हैं.
तो बहुत ज्यादा तेजी से पढ़ाई करने की सोचते हैं और सभी चीजें याद करने की सोचते हैं लेकिन यदि आप इन चीजों पर ध्यान नहीं देते हैं तो आप भूल जाएंगे यदि आप इनको अच्छी तरह से समझ कर और सोचकर जाते हैं तब आपको यह चीजें याद भी रहेगी और उनकी अलग-अलग पहचान भी रहेगी इसलिए आपको इन चीजों को समझना बहुत ही जरूरी है. तो हम आपको आज इस पोस्ट में हिंदी व्याकरण के विशेषण विषय के बारे में पूरी जानकारी दे रहे हैं. ताकि आपको एग्जाम देते समय किसी भी तरह की दिक्कत ना हो और इस तरह के पूछे गए कुछ सवालों के आप आसानी से जवाब दे सके. हम आपको यह सभी जानकारी उदाहरण सहित समझाएंगे ताकि आपको अच्छे से समझ में आए तो देखिए.
विशेषण का अर्थ
सबसे पहले हम बात करते हैं विशेषण शब्द का अर्थ क्या होता है. विशेषण शब्द का अर्थ होता है. किसी शब्द की विशेषता को बताना और विशेषण शब्द का काम संज्ञा या सर्वनाम के शब्दों की विशेषता बताना होता है. यही विशेषण का अर्थ होता है.विशेषण शब्द के अर्थ के साथ ही विशेषण शब्द की परिभाषा जुड़ी हुई है. तो नीचे हम आपको विशेषण की परिभाषा बताते हैं.
विशेषण की परिभाषा
जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम शब्दों की विशेषता या गुण बताते है विशेषण कहलाते हैं।
जैसे – ‘कालाकोट’ और ‘अच्छा लड़का’ में ‘काला’ तथा ‘अच्छा’ शब्द विशेषण है। जिन शब्दो की विशेषता बताई जाती है, उन्हे विशेष्य कहते है। ऊपर के उदहारण में कोट अथवा लड़का शब्द विशेषण है।
- आम मीठा है।
- राम पढ़ने में तेज है।
- कुछ लोग खेलना भी नहीं चाहते।
- लड़का अच्छा गाता है।
विशेष्य किसे कहते हैं
तो अब हम हम आपको बताएंगे कि विशेष्य क्या होता है. नीचे हम आपको कुछ उदाहरण बताएंगे. जिसके द्वारा हम आपको बताएंगे विशेष्य क्या होता है और विशेष्य और विशेषण दोनों में क्या अंतर होता है. तो देखिए.
प्रविशेषण किसे कहते हैं
अब हम आपको बता देते हैं कि प्रविशेषण क्या होते हैं प्रविशेषण और शब्दों को कहा जाता है जो विशेषण शब्दों की भी विशेषता को बताए. उन्हें विशेषण कहते हैं.
इस वाक्य में सीता शब्द है वह किसकी लड़की का नाम है. वह उसके बारे में यह बताया जा रहा है कि वह बहुत सुंदर है. सीता ही वह लड़की है. जो बहुत सुंदर है. और सीता शब्द संज्ञा है. और सीता के लिए एक शब्द सुंदर का प्रयोग किया गया है यानी संज्ञा शब्द सीता की विशेषता को बताने वाला शब्द सुंदर है. तो इस वाक्य में सुंदर शब्द सीता की विशेषता को बता रहा है. इसलिए यह सुंदर शब्द विशेषण है. लेकिन अब आगे बात आती .है कि यदि सुंदर शब्द विशेषण है. तो जो संज्ञा शब्द सीता को क्या कहेंगे तो आप को यह ध्यान में रखना होगा कि जिस शब्द की विशेषता बताई जाती है. या विशेषण शब्द जिस सर्वनाम या संज्ञा शब्द की विशेषता को बताता है.उन संज्ञा या सर्वनाम शब्दों को ही हम विशेष्य कहते हैं.
इस वाक्य में गर्मी शब्द संज्ञा है. और अधिक शब्द भी आया है और यह अधिक शब्द गर्मी की विशेषता को दर्शाने के लिए आया है. यह गर्मी की विशेषता बता रहा है. और यह विशेषण शब्द है.और संज्ञा होने के कारण गर्मी शब्द विशेष्य भी है. क्योंकि जिस शब्द की विशेषता को बताया जाता है. उसे ही विशेष्य कहा जाता है. और यहां पर गर्मी शब्द की विशेषता बताई जा रही है. इसलिए गर्मी शब्द विशेष्य है. इस वाक्य में आपको एक और चीज भी मिलेगी यहां पर अधिक शब्द जो विशेषण है उसकी भी विशेषता बताने के लिए एक शब्द का प्रयोग किया गया है. और वह शब्द बहुत है. और अब हम आपको बता देते हैं. कि जो शब्द विशेषण की विशेषता बताते हैं. उन्हें प्रविशेषण कहते हैं.
इस वाक्य में रतन शब्द संज्ञा है और परिश्रमी शब्द का प्रयोग रतन की विशेषता को बताने के लिए प्रयोग किया गया है. कि रतन एक परिश्रमी व्यक्ति है. परिश्रमी शब्द रतन शब्द की विशेषता बताने के कारण विशेषण है. रतन शब्द की विशेषता बताई जा रही है. क्योंकि रतन शब्द संज्ञा तो है. ही और इसकी विशेषता बताने के कारण इसलिए हम इसे विशेष्य भी कहेंगे.और यदि इस वाक्य को हम ध्यान से देखते हैं तो घोर शब्द परिश्रमी की विशेषता बता रहा है. यानी घोर शब्द विशेषण की विशेषता बता रहा है और इसलिए घोर शब्द प्रविशेषण है.
विशेषण कितने प्रकार के होते हैं (विशेषण के कितने भेद होते हैं)
ऊपर हमने आपको बताया कि विशेषण का अर्थ क्या होता है विशेषण की परिभाषा क्या होती है, विशेष्य किसे कहते हैं, और प्रविशेषण किसे कहते हैं, और इनके बारे में कुछ उदाहरण भी बताए हैं अब हम बात करेंगे विशेषण कितने प्रकार के होते हैं.
- गुणवाचक विशेषण (Gunvachak Visheshan)
- संख्यावाचक विशेषण (Sankhya Vachak Visheshan)
- परिमाणवाचक विशेषण (Parimaan Vachak Visheshan)
- सार्वनामिक विशेषण (Sarvanamik Visheshan)
विशेषण के प्रकार
अलग-अलग वाक्यों में अलग-अलग तरह से विशेषता बताने के कारण विशेषण को चार वर्गों में बांटा गया है. इसलिए हम बहुत ही आसानी से यह कह सकते हैं. कि विशेषण चार प्रकार के होते हैं. तो आइए देखते हैं. अभी कौन-कौन से चार प्रकार के विशेषण होते हैं.गुणवाचक विशेषण, संख्यावाचक विशेषण ,परिमाणवाचक विशेषण, सार्वनामिक विशेषण यह सभी विशेषण के प्रकार होते हैं, तो अब हम आपको नीचे इन चारों के बारे में पूरी और विस्तार से जानकारी देंगे थोड़ा आपको अच्छे से समझाएंगे, ताकि आप को समझने में दिक्कत ना हो तो सबसे पहले हम बात करेंगे गुणवाचक विशेषण की, तो देखिए,
1.गुणवाचक विशेषण
जैसा कि आप इस के नाम से ही अंदाजा लगा सकते हैं. गुणवाचक विशेषण गुण यानि किसी की गुणवत्ता बताना. वाचक यानी बताने वाला लेकिन सिर्फ गुणवाचक विशेषण में गुण ही नहीं बताए जाते हैं इसके अलावा भी और भी बहुत सी चीजें गुणवाचक विशेषण में बताई जाती है. जैसे जो किसी संज्ञा सर्वनाम शब्द का गुण, दोष, आकार-प्रकार, रंग, रूप , गंध आदि बताता है उसे गुणवाचक विशेषण कहते हैं. नीचे हम आपको इसके उदाहरण बताएंगे जिससे कि आप गुणवाचक विशेषण आसानी से पहचान सकते हैं.
इस वाक्य में आप देख सकते हैं. मोहन बुद्धिमान लड़का है. यहां पर बुद्धिमान शब्द लड़का की विशेषता बता रहा है. मोहन कि बुद्धिमान लड़का है. और लड़का शब्द संज्ञा है. और बुद्धिमान शब्द विशेषता बताने के कारण विशेषण है. इसकी विशेषता बताई जा रही है इसलिए लड़का शब्द विशेष्य हुआ. बुद्धिमान को विशेषण कहेगे. इस वाक्य में बुद्धिमान यानि किसी व्यक्ति के गुण बताए जा रहे हैं. इसलिए यह गुणवाचक विशेषण है.
इस वाक्य में बेईमान शब्द आदमी की विशेषता बता रहा है. और आदमी शब्द संज्ञा है. और इस संज्ञा शब्द की विशेषता बताई जा रही है. इसलिए यह विशेष्य है. और विशेषता को बताने वाला शब्द बेईमान है इसलिए यह विशेषण है .यहां पर इस वाक्य में मुकेश नाम के आदमी का दोष बताया जा रहा है. यानी बेईमान शब्द दोष है. यह भी गुणवाचक विशेषण के अंतर्गत आता है. क्योंकि जैसा की हमने आपको ऊपर बताया है किसी भी संज्ञा या सर्वनाम के शब्द जैसे गुण-दोष आकार-प्रकार रंग रूप आदि की विशेषता बताने वाले शब्दों को गुणवाचक विशेषण होते है.
2.संख्यावाचक विशेषण
जैसा कि आप इस के नाम से ही अंदाजा लगा सकते हैं संख्यावाचक विशेषण संख्या यानि किसी भी तरह की संख्या हो सकती है वाचक यानी बताने वाला जो शब्द किसी भी संज्ञा या सर्वनाम शब्दों की संख्या को बताता है. उसकी गिनती को बताता है. या उनके नंबरों को बताता है. उन शब्दों को संख्यावाचक विशेषण कहते हैं नीचे हम आपको इसके उदाहरण बताएंगे ताकि आपको अच्छे से समझ में आए तो आप इसके उदाहरण देखना ना भूलें.
इस वाक्य में आप देख सकते हैं. कि पुस्तकें शब्द संज्ञा है. और पुस्तके शब्द जो संज्ञा है. इसकी विशेषताओं को बताने के लिए पांच शब्द का प्रयोग किया गया है. जो पुस्तकों की संख्या बता रहा है. इससे हमें पता चल रहा है. कि पुस्तकें सिर्फ पांच ही हैं. इसलिए इस पांच शब्द के कारण विशेषताएं बताई जा रही है.तो यह संख्यावाचक विशेषण होगा. क्योंकि जब कोई संख्या संज्ञा या सर्वनाम शब्द किसी की संख्या का बोध कराएं उसे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं.
लेकिन आपको इस विशेषण में एक बात और भी ध्यान रखनी है इस वाक्य में आप देख सकते हैं यह पुस्तकों की निश्चित संख्या 5 बता रहा है यानी सिर्फ उसके पास ही है तो यह निश्चय संख्यावाचक विशेषण है और यदि 5 शब्द की जगह पर कुछ आता तो उससे पुस्तकों की निश्चय संख्या का पता नहीं चलता तो वह अनिश्चय संख्यावाचक विशेषण कहलाता है. जिसका उदाहरण हम आपको नीचे दे रहे हैं तो देखिए.
इस वाक्य में आप देख सकते हैं. कि पैसे शब्द संज्ञा है और इसकी विशेषता को बताने के लिए कुछ शब्द का प्रयोग किया गया है. क्योंकि पैसे किसी निश्चित संख्या में नहीं है. वह कितने भी हो सकते हैं 10, 20, 50 भी हो सकते हैं. यानी उनकी निश्चित संख्या में होने के कारण यह निश्चित संख्यावाचक विशेषण कहलायेगा..तो आप को यह ध्यान में रखना है कि संख्यावाचक विशेषण दो प्रकार के होते हैं निश्चित संख्यावाचक विशेषण और अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण.
निश्चित संख्यावाचक विशेषण होते हैं. जिनमें किसी चीज की संख्या का निश्चय किया हुआ होता है. यानी उनकी गणना की हुई होती है वह निश्चित संख्यावाचक विशेषण कहलाते हैं. और अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण होते हैं जिनमें किसी चीज की संख्या की गणना नहीं होती है लेकिन होती संख्या है तो वह अनिश्चित संख्यावाचक कहलाते है.
3.परिमाणवाचक विशेषण
आप परिमाणवाचक विशेषण को तो बहुत ही आसानी से समझ सकते हैं. इसका तो अंदाजा आपको वैसे भी हो जाएगा क्योंकि परिमाण का अर्थ माप-तोल होता है.वाचक यानी बताने वाला जो शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम के शब्दों के माप तोल यानी उसके वजन आदि को बताता है. उसे हम परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं. नीचे हम आपको इसके कुछ उदाहरण दे रहे हैं. जिससे आप इस विशेषण को समझ सकते हैं. इन उदाहरणों में आपको इन चीजों के बारे में बताया जाएगा कि आप किस तरह से इस विशेषण की पहचान कर सकते हैं. तो देखिए.
इस वाक्य में आप देख सकते हैं. कि सोनू पांच किलो चीनी लाएगा. इस वाक्य में ना ही तो किसी तरह का गुण बताया जा रहा है. ना ही किसी तरह का दोष बताया जा रहा है. ना ही इसका आकार बताया जा रहा है. क्योंकि इसमें सिर्फ माप-तोल बताया जा रहा है. कि सिर्फ सोनू पांच किलो चीनी लएगा. यानी उस चीनी का वजन बताया गया है. और इसीलिए जब वाक्य में किसी भी तरह का वजन बताया जाए या माप-तोल बताया जाए तो वह वाक्य परिमाणवाचक विशेषण कहलाएगा. और इस वाक्य में चीनी शब्द विशेष्य है. क्योंकि शक्कर की विशेषता बताई गई है और जिस शब्द की विशेषता बताई जाए वह वह शब्द विशेष्य कहलाता है और यह एक संज्ञा शब्द है.
इस वाक्य में आप देख सकते हैं कि राजू ने तीन मीटर कपड़ा खरीदा है. इस वाक्य में कपड़ा शब्द संज्ञा है. उसकी विशेषता को बताने के लिए तीन मीटर का प्रयोग किया गया है और यहां पर कपड़े का माप तोल बताया गया है. यानी कपड़ा तीन मीटर है. इसलिए 3 मीटर परिमाणवाचक विशेषण कहलाएगा और कपड़ा शब्द संज्ञा है. इसलिए इसे विशेष्य से भी कहेंगे. क्योंकि इसकी विशेषता बताई जा रही है और जिस की विशेषता बताई जाए उस शब्द को विशेष्य कहते हैं.
लेकिन इस विशेषण मैं आपको एक बात ध्यान रखने की जरूरत होती है. परिमाणवाचक विशेषण में कई बार निश्चित माप-तोल का वाक्य भी आता है. और कई बार अनिश्चित माप-तोल का वाक्य भी आ सकता है. यह अनिश्चित भी हो सकता है. और निश्चित भी हो सकता है. यानि किसी चीज की पूरी माप-तोल बताई जा सकती है. या कुछ अंदाजा लगा कर भी बताया जा सकता है.
4.सार्वनामिक विशेषण
यह विशेषण का चौथा और अंतिम भाग है तो सार्वनामिक विशेषण में दो शब्द आते हैं. सर्व और नाम सार्वनामिक सर्वनाम के नाम वाला शब्द यानी ऐसा विशेषण शब्द जो है तो सर्वनाम लेकिन विशेषण का काम कर रहा है. या वह शब्द जो सर्वनाम होते हुए भी विशेषण का कार्य करें उसे सार्वनामिक विशेषण कहते हैं. तो हम आपको इसके उदाहरण बताएंगे ताकि आपको इसकी परिभाषा थोड़ी आसानी से समझ में आए क्योंकि यह परिभाषा थोड़ी सी कठिन है. इसलिए यदि आप उदाहरण देखेंगे. तो आपको बहुत ही आसानी से और जल्दी समझ में आ जाएगा तो आप इन सभी विशेषण के भागो के उदाहरण जरूर देखें.
इस वाक्य में आप देख सकते हैं. यह घर मेरा है यदि आप ध्यान से देखते हैं. तो घर शब्द संज्ञा है. और इस वाक्य में घर शब्द की विशेषता को बताने का काम यह शब्द कर रहा है. किसी और का नाम नहीं लिया जा रहा है. बल्कि यह घर मेरा है. यह के कारण ही घर की विशेषता बताई जा रही है. इसलिए यह शब्द विशेषण तो है. ही साथ में यह सर्वनाम होने के कारण इसे हम सार्वनामिक विशेषण कहेंगे. क्योंकि यह सर्वनाम है और काम विशेषण का कर रहा है. इसलिए यह सर्वनाम विशेषण कहलाएगा.
लेकिन इसमें आपको यह बात ध्यान में रखनी होगी कि यदि यह घर मेरा है. की जगह पर यह मेरा घर है आ जाता है. तो यह वाक्य सार्वनामिक विशेषण नहीं रहता है. क्योंकि यह शब्द सिर्फ विशेषण का काम नहीं करेगा. क्योंकि घर की विशेषता बताने के लिए अब यह शब्द का प्रयोग किया गया है. और बाद में यह शब्द के तुरंत बाद मेरा शब्द आएगा. तो मेरा शब्द घर की विशेषता बताई जाएगी और फिर यह निश्चयवाचक विशेषण का उदाहरण बन जाएगा.
इस वाक्य को आप ध्यान से देखिए इस वाक्य में साइकिल शब्द संज्ञा है और इसकी विशेषता को बताने के लिए वह शब्द का प्रयोग किया गया है.इसलिए यहां पर भी वह शब्द सर्वनाम है. लेकिन विशेषण का काम कर रहा है. तो यह सार्वनामिक विशेषण का उदाहरण है.
तो इस वाक्य में भी आप देख सकते हैं. कॉपियां शब्द संज्ञा है. और इसकी विशेषता को बताने के लिए या इसकी विशेषता को दर्शाने के लिए ये शब्द का प्रयोग किया गया है. यानी ये शब्द सर्वनाम है. लेकिन यह काम विशेषण के रूप में कर रहा है. इसलिए इसको सार्वनामिक विशेषण कहा जाएगा.
विशेषणों की रचना
कुछ शब्द मूलरूप से ही विशेषण होते है; जैसे- अच्छा, बुरा, सुंदर, चतुर आदि कुछ विशेषण शब्दों की रचना अन्य शब्दों में उपसर्ग-प्रत्यय आदि लगाकर की जाती है।
संज्ञा शब्दों से विशेषण रचना
| संज्ञा | विशेषण |
| भूख | भूखा |
| विष | विषैला |
| जीव | जीवित |
| प्यास | प्यासा |
| लोभ | लोभी |
| रंग | रंगीन |
| अंत | अंतिम |
| निति | नैतिक |
| गुण | गुणवती/गुणवान |
सर्वनाम शब्दों से विशेषण रचना
| संज्ञा | विशेषण |
| वह | वैसा |
| यह | ऐसा |
| आप | आप-सा |
| कौन | कैसा |
| मैं | मुझ-सा |
| जो | जैसा |
क्रिया शब्दों से विशेषण रचना
| संज्ञा | विशेषण |
| बिकना | बिकाऊ |
| खेलना | खिलाड़ी |
| तैरना | तैराक |
| सड़ना | सड़ियल |
| भूलना | भुलक्क़ड |
| टिकना | टिकाऊ |
अव्यय शब्दों से विशेषण रचना
| संज्ञा | विशेषण |
| नीचे | निचला |
| भीतर | भीतरी |
| बाहर | बाहरी |
| ऊपर | ऊपरी |
| पीछे | पिछला |
विशेषण की अवस्थाएं
हमने आपको ऊपर विशेषण के प्रकार बता दिया लेकिन अब आप को हम विशेषण की अवस्थाएं बताएंगे विशेषण की कितनी अवस्थाएं होती हैं. तो देखिए
1. इसमें विशेषण की तीन अवस्थाएं होती हैं. यानी विशेषण को 3 प्रकार से लिखा जा सकता है पहला विशेषण शब्द का सामान्य रूप होता है जिसको हम मूलावस्था कहते हैं. यानी प्रारंभिक अवस्था विशेषण शब्द जब प्रारंभिक अवस्था में लिखा जाता है तब वह उसकी मूल अवस्था कहलाता है.विशेषण शब्द की दूसरी अवस्था को उत्तरावस्था और विशेषण शब्द की तीसरी अवस्था उत्तमावस्था होती है. हम आपको एक उदाहरण के साथ समझाते हैं कि यह अवस्थाएं कैसी होती है और इसमें शब्दों को किस तरह से लिखा जा सकता है जैसे
मूलावस्था = निम्न
उत्तरावस्था = निम्नतर
उत्तमावस्था = निम्नतम
इस तरह से विशेषण की अवस्था में एक ही शब्द को कुछ अलग अलग तरीके से लिखा जा सकता है. जैसे मूलावस्था में निम्न लिखा जाएगा. और उत्तरावस्था में निम्नतर लिखा जाएगा. और इसी तरह से उत्तमावस्था में इसको निम्नतम लिखा जाएगा तो यह तीन प्रकार की विशेषण की अवस्थाएं होती हैं.
विशेषण की मूल अवस्था में जब हम किसी चीज का वर्णन करते हैं. या किसी व्यक्ति वस्तु या किसी अन्य चीज का वर्णन करते हैं. तो हम सामान्य रूप से वर्णन करते हैं. तो उसको मूलावस्था में लिखा जाएगा. जब दो व्यक्तियों या वस्तुओं में तुलना की जाती है.तो उस समय विशेषण की उत्तरावस्था का प्रयोग किया जाता है. और विशेषण की उत्तमावस्था का प्रयोग तब किया जाता है. जब हम किसी दो व्यक्तियों या वस्तुओं में से किसी एक को ज्यादा महत्व देते हैं. उस समय उत्तमावस्था का प्रयोग किया जाता है.तो अब आपको अच्छे से पता चल गया होगा कि विशेषण की अवस्थाएं क्या होती है और कितने प्रकार की होती हैं.
तो आज हमने आपको इस पोस्ट में विशेषण के कितने भेद होते हैं ,विशेषण उदाहरण , विशेषण किसे कहते हैं विशेषण के उदाहरण विशेषण के प्रकार विशेषण इन हिंदी विशेषण की परिभाषा से संबधित महत्वपूर्ण जानकारी बताइए यह जानकारी आपको बहुत ही पसंद आई होगी और आप को बहुत ही अच्छी लगेगी .
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Visheshan Kise Kahate Hai FAQ (विशेषण से जुड़े कुछ सवाल)
विशेषण किसे कहते हैं?
संज्ञा और सर्वनाम शब्दों की विशेषता बताने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं। विशेषण एक ऐसा शब्द है, जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है।
विशेष्य किसे कहते हैं?
जिस शब्द की विशेषता बताई जाए, वह विशेष्य कहलाता है।
विशेषण के कितने भेद होते हैं
- गुणवाचक
- संख्यावाचक
- परिमाण वाचक
- सार्वनामिक
विशेषण की पहचान कैसे होती है?
जब भी किसी वाक्य में विशेषण का पता करना होता हैं तो ऐसे में वाक्यों में संज्ञा या सर्वनाम के पहले कैसा/कैसी/कैसे अथवा कितना/कितनी/कितने को जोड़कर प्रश्न करने पर जो उत्तर मिलता हैं उसे विशेषण कहते हैं।
गुणवाचक विशेषण किसे कहते है
जो विशेषण शब्द संज्ञा/सर्वनाम शब्दों के गुण, अवस्था, रंग, रूप, आकार आदि का बोध कराते है, वे गुणवाचक विशेषण कहलाते है।
संख्यावाचक विशेषण किसे कहते है
जो विशेषण शब्द संज्ञा या सर्वनाम शब्दों की संख्या बताते है, वे संख्यावाचक विशेषण कहलाते है।
परिमाणवाचक विशेषण किसे कहते है
जो विशेषण शब्द संज्ञाओं की माप बताते है, वे परिमाणवाचक विशेषण कहलाते है।
सार्वनामिक विशेषण किसे कहते है
जो सर्वनाम शब्द संज्ञा से पहले लगकर उसकी विशेषता बताते है, वे सार्वनामिक विशेषण कहलाते है।
क्रिया के कितने भेद होते हैं?
क्रिया के भेद कर्म के आधार पर और रचना के आधार पर अलग-अलग होते हैं। क्रिया को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है। कर्म के आधार पर क्रिया दो प्रकार की होती है:
1. अकर्मक क्रिया
2. सकर्मक क्रिया
क्रियाविशेषण के कितने भेद होते हैं?
क्रिया विशेषण को तीन आधार पर विभाजित किया गया हैं. यह निम्न-अनुसार हैं:
1. प्रयोग के आधार पर
2. रूप के आधार पर
3. अर्थ के आधार पर






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